व्यवहार-कुशलता

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Summary of class 10 alternative Hindi chapter 6 of Nagaland Board of School Education: प्रस्तुत निबंध में लेखक अनन्त गोपाल शेवड़े ने इस बात पर बल दिया है कि व्यक्तियों को एक दूसरे के सहारे और प्रोत्साहन की सबसे अधिक आवश्यकता उस समय होती है जब वह निराशा में डूबे हुए हो l ऐसे समय हमारी सहानुभूति और सहायता उनके खोए हुए आत्मविश्वास को वापस ले आती है l दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना, उनके साथ सच्चाई और स्नेह का व्यवहार करना ना केवल सज्जनता है, बल्कि सच्ची व्यवहार-कुशलता है l

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1. विद्यार्थी के भाषण पर श्रोताओं ने तालियां क्यों पिटी?

उत्तर: विद्यार्थी जब भाषण देने के लिए खड़ा हुआ तो उसका भाषण जमा नहीं l वह घबरा गया l और बोल नहीं पाया तो श्रोताओं ने उसका मजाक उड़ाने के लिए तालियां पीटी l

2. भाषण देने में असफल विद्यार्थी की हिम्मत लेखक ने किस प्रकार बढ़ाएं?

उत्तर: भाषण देने में असफल विद्यार्थी की हिम्मत लेखक ने यह कहकर बढ़ाई की शुरू शुरू में तो ऐसा ही होता है पर बाद में आदत होने से यह सब दूर हो जाता है l

3. लेखक के प्रोत्साहन का विद्यार्थी पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: लेखक के प्रोत्साहन से विद्यार्थियों में हिम्मत आई और आगे चलकर वह काफी अच्छा व्यक्ति बन गया l

4. लोगों को हमारी सहानुभूति की सबसे अधिक आवश्यक त्या कब होती है?

उत्तर: जब लोग त्रस्त हो, पराजित हो, शोकग्रस्त हो तभी उन्हें हमारी सहानुभूति, सहायता या प्रोत्साहन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है l

5. मनुष्य की किन दो मूल प्रवृत्तियों की और लेखक ने ध्यान दिलाया है?

उत्तर: मनुष्य की दो मूल प्रवृतियां होती है कि लोग हमारे गुणों की कद्र करें, हमें दाद दे, हमारा आदर करें और वे हम पर प्रेम करें, हमारा अभाव महसूस करें, उनके जीवन में हम कुछ महत्व रखते हैं ऐसा अनुभव करें l

6. किसी व्यक्ति के ह्रदय को जीतने के लिए हमें किस तरह का व्यवहार करना चाहिए?

उत्तर: किसी व्यक्ति के ह्रदय को जीतने के लिए हमें व्यवहार कुशल होना चाहिए, सच्चे दिल से दूसरों के सुख दुख में दिलचस्पी लेना चाहिए l इसमें बनावतीपन, दिखावा, और ऊपरी शिष्टाचार नहीं होना चाहिए l

निम्नलिखित वाक्यांशों के संदर्भ सहित सप्रसंग व्याख्या कीजिए-

1. “ऐसा! तब तो तुमने बड़ी हिम्मत दिखाई ! मैं तो अपने पहले भाषण में मुश्किल से तीन वाक्य भी ठीक से नहीं बोल पाया था l शुरू शुरू में तो ऐसा होता ही है, पर बाद में आदत होने से यह सब दूर हो जाता है l”

प्रसंग: यह प्रसंग उस समय का है जब एक विद्यार्थी भाषण देने के समय घबरा गया और उसका भाषण जमा नहीं l लेखक के पूछने पर वह कहता है कि वह उसका पहला भाषण था, तब लेखक ने उसे प्रोत्साहित किया l

व्याख्या: विद्यार्थी जब पांच 10 शब्द बोल कर घबरा कर वापस आ गया तब लेखक ने उसकी हिम्मत बढ़ाते हुए कहा कि वह भी अपने पहले भाषण में घबरा गया था और ठीक से नहीं बोल पाए थे l लेखक की बात सुनकर वह आश्वस्त हो गया और उसकी हिम्मत लौट आए l

2. “जब लोग त्रस्त होते हो, पराजित हो या शोक-ग्रस्त हो तभी उन्हें हमारी सहानुभूति, सहायता या प्रोत्साहन की जरूरत होती है l उस समय आदमी का आत्मविश्वास लड़खड़ा जाता है l”

उत्तर: संदर्भ: संदर्भ प्रस्तुत अवतरण अनंत गोपाल शेवड़े द्वारा रचित व्यवहार कुशलता पाठ से लिया गया है l

प्रसंग: इन वाक्यों के माध्यम से लेखक यह समझाना चाहते हैं कि कब लोगों को हमारी सहानुभूति की सबसे ज्यादा जरूरत होती है l

व्याख्या: लेखक के अनुसार लोगों को हमारे सहानुभूति की आवश्यकता सबसे अधिक तब पड़ती है जब लोग त्रस्त हो, पराजित हो, शोक ग्रस्त हो l उस समय उनका आत्मविश्वास लड़खड़ा जाता है ऐसे समय में हमें उन्हें सहारा और प्रोत्साहन देना चाहिए l

3. “मानव की दो मूल प्रवृतियां होती है l एक तो यह कि लोग हमारे गुणों की कद्र करें, हमें दाद दे और हमारा आदर करें और दूसरा वे हम पर प्रेम करें, हमारा अभाव महसूस करें, उनके जीवन में हम कुछ महत्व रखते हैं- ऐसा अनुभव करें l”

उत्तर: संदर्भ: संदर्भ प्रस्तुत अवतरण अनंत गोपाल शेवड़े द्वारा रचित व्यवहार कुशलता पाठ से लिया गया है l

प्रसंग: इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने मनुष्य के दो जन्मजात मूल प्रवृत्तियों का वर्णन किया है l

व्याख्या: लेखक के अनुसार मानव के दो मूल प्रवृत्ति होती है l एक तो यह कि लोग हमारी गुणों का कद्र करें, हमें दाग दे और हमारी आदर करें और दूसरा वह हम पर प्रेम करें हमारा अभाव महसूस करें, उनके जीवन में हम कुछ महत्व रखते हैं ऐसा अनुभव करें l

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